ऐसा करके वे माता से शांति की प्रार्थना कर सकते हैं. फूल, कपूर, अगरबत्ती, ज्योत के साथ पंचोपचार पूजा करें। पूर्ण विधि के अनुसार शुभ मुहूर्त में कलश को स्थापित करें। यह समय आत्मज्ञान और ईश्वर के करीब जाने का अवसर प्रदान करता है। अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा https://leem431nyi2.blogozz.com/38351021/the-2-minute-rule-for-shani-ko-jhukaya-nahi-jaata